Hindi quotes of love, life & relationship, Hindi Kahani (हिन्दी कहानी)
“भरोसेमन्द दोस्त(THE LOYAL FRIEND”
एक बार एक राजा एक बन्दर से दोस्त बन गया। वह बन्दर राजा के साथ हर समय रहता था। एक दिन दोपहर में राजा आराम कर रहा था। तभी एक मक्खी खिड़कि के रास्ते राजा के कमरे में आ गयी। वह राजा के बिस्तर के पास कुछ देर भनभनाती रही और अन्त में राजा के नाक पर जा कर बैठ गयी। बन्दर राजा के बिस्तर के पास बाडीगार्ड के रुप में बैठा था।जब उसने मक्खी को राजा के नाक के पास बैठा देखा तो उसने अपने हाथ से मक्खी को भगाया । मक्खी वहाँ से उडी और दुबारा राजा के नाक पर आकर बैठ गयी। इस बार बन्दर ने अपने रुमाल से मक्खी को भगाया।
परन्तु मक्खी राजा के नाक पर आकर तीसरी बार बैठ गयी, इस पर बन्दर को बहुत गुस्सा आ गया। बन्दर ने राजा के पास रखी तलवार को उठा लिया और मक्खी को भगाने के लिए चलाया लेकिन मक्खी एक बार फिर उड गयी परन्तु राजा कि नाक कट गयी। राजा दर्द से कराहता हुआ निंद से जाग गया।
एक बार एक चींटी एक तालाब में गिर गयी। वह डूब रही थी। एक बत्तख ने उस डूबते हुए चींटी को देखा।उसने पास के पेड से एक पत्ता तोडा और बत्तख की तरफ पानी में फेक दिया। चींटी ने कुछ देर तक प्रयास किया और अंत में उस पत्ते पर चढ गयी। पत्ता धीरे धीरे बहाव के साथ तालाब के किनारे पहुँच गया और चींटी भी पत्ते के सहारे तालाब के किनारे सुरक्षीत पहुँच गयी। और इस तरह वह बत्तख के परोपकार और सहायता के कारण बच गयी।
बहुत दिन बीत गये। एक दिन दोपहर के वक्त जंगल में चींटी भोजन के तालाश में जमीन पर चली जा रही थी। उसने देखा कि बत्तख पास के एक झाडी में बैठा हुआ है। वह उसे बुलाने ही वाला था कि उसने एक शिकारी को देखा। शिकारी के हाथ में बंदुक थी और वह बत्तख कि ओर निशाना लगाये हुए था। चींटी ने सोचा कि बत्तख की जान खतरे में है इसलिए चींटी तुरन्त शिकारी के पैर पर चढ गयी और अपनी पुरी ताकत लगाकर उसे जोर से काटा। चींटी के जोर से काटने के कारण शिकारी के हाथ से बन्दक छिटक गयी और शिकारी का निशाना चूक गया। बन्दुक की आवाज से बत्तख को यह पता चल गया कि कोई ना कोई खतरा जरुर है और वह वहाँ से उड गया। इसप्रकार बत्तख की सहायता करके चींटी ने उसका एहसान(परोपकार) चुकाया।
एक बार एक कौआ, भोजन की तालाश में एक गाँव के उपर से उडता हुआ जा रहा था। अचानक उसने जमीन पर पडा हुआ एक माँस का टुकडा देखा। वह उडता हुआ निचे आया और अपनी चोंच में माँस के टुकडे को दबाकर उड गया। इसके बाद वह उडता हुआ एक पेंड की उँची शाखा(डाल) पर जाकर बैठ गया।
उस पेड के नीचे से एक लोमडी जा रही थी। उसने कौआ के चोंच में ताजा माँस का टुकडा देखा तो उसे लालच आ गया और वह रुक गयी। कौए के चोंच में माँस का टुकडा देखकर लोमडी के मुँह में पानी भर आया। जल्दी ही लोमडी ने कौए के मुँह से माँस का टुकडा छिनने के लिए एक योजना बनाई। लोमडी पेड के नीचे गयी और वहाँ बैठ गयी। लोमडी ने कौए कि ओर देखा और बोला, “कौआ भाई। आज तुम बहुत सुन्दर लग रहे हो”। इस पर कौए ने कुछ नही बोला।
“इतने दिन तक तुम कहाँ थे? आज तुम पहले से बहुत ज्यादा सुन्दर लग रहे हो। निश्चित हि तुमने कोई नया स्टाईल सीखा है।
अपनी इतनी सारी बडाई सुनकर कौए को अपने उपर गर्व होने लगा। लेकिन उसने सोचा कि अगर वह लोमडी से बात करेगा तो उसके मुँह से माँस का टुकडा गिर जायेगा। यह सोचकर कौआ शांत रहा और उसने कुछ भी नहीं बोला।
कुछ देर बाद लोमडी ने फिर बोला, “लगता है बसंत का मौसम खत्म हो गया है। इस भयानक गर्मी के मौसम में केवल तुम्हारी मधुर आवाज ही मुझे खुश कर सकती है। क्या तुम मुझे खुश करने के लिए एक प्यार का गीत गाओगे?”
इस बार कौआ अपने आप को रोक नहीं पाया और कौए से रहा नही गया। उसने गाना गाने के लिए अपने मुँह को बडा सा खोला और जैसे ही उसने मुँह खोला, उसके मुँह से माँस का टुकडा नीचे जमीन पर गिर गया। जैसे ही माँस का टुकडा जमीन पर गिरा नीचे बैठी लोमडी ने तुरन्त माँस के टुकडे को उठाया और तुरन्त वहाँ से भाग गयी और पीछे मुडकर एक बार भी नही देखा।
एक समय की बात है एक गॉव में सोनू और मोनू नाम के दो दोस्त रहते थे। वे बहुत गरीब थे। वे भीख माँग कर अपना गुजारा करते थे। सोनू अंधा था जबकि मोनू लँगड़ा था। वह बिना किसी के मदद के चल नही सकता था। एक दिन सोनू ने सुना कि उसके नजदिक के गाँव में एक धार्मिक मेला लगा हुआ है। उसने मोनू से बोला, “दोस्त, हमे उस मेले मे जरुर जाना चहिए। वहाँ बहुत धनी और दयावान लोग आयेगे जिनसे हमे बहुत सारा दान – दक्षिणा और खाने की चीजे मिलेगी”।
“लेकिन सोनू, हम उतनी दूर जायेगे कैसे? तुम अन्धे हो इसलिए तुम रास्ता देख नही सकते और मैं लगड़ा इसलिए मैं इतनी अधिक दूर चल नहीं सकता।”
इस बात पर सोनू मुस्कुराया और बोला, “मोनू, तुम अपना दिल छोटा मत करो। मैंने वहाँ जाने का एक तरीका खोज लिया है। मै अंन्धा हूँ पर मैं लम्बी दूरी चल सकता हूँ और तुम लगड़े हो परन्तु देख सकते हो। इसलिए तुम मुझे मेला का रास्ता बता सकते हो। अब तुम मेरे कन्धे पर बैठ जाओ और मुझे मेले मे जाने का रास्ता बताओ, मैं तुम्हे मेले तक ले जाउँगा। इस तरह दोनो दोस्त मेला घुमने गये और मेले का आनन्द लिया।
एक बार एक राजा था जो अपना खाली समय पेंटिग बनाने में व्यतीत करता था। एक बार वह एक शिकार पर गया। कुछ समय शिकार करने के बाद वह थक गया। वह वहाँ पर अपने पेंटिग का सामान भी लेकर गया था। इसलिए थक जाने के बाद उसने पेंटिग करने के बारे में सोचा और अपने कैनवास,रंग और पेंटिग ब्रश को निकाला और पास कि एक छोटि पहाडि पर चला गया। वहाँ से उसे सूर्यास्त का एक अदभुत नजारा दिख रहा था। वह इस सुन्दर दृश्य का पेंटिग बनाने लगा और जल्द हि उसने पेंटिग बनाकर समाप्त कर लिया। पेंटिग बनाने के बाद वह इसकी खुद ही प्रशंसा करने लगा। वह कभी पेटिंग को दायें से देखता, कभी बायें से देखता, कभी आगे से देखता तो कभी पीछे से। वह अपनी पेंटीग को देखने के लिए पीछे की तरफ जाने लगा और सोचने लगा की देखता हूँ मेरी पेटिंग दूर से देखने में कैसी लगती है ? उसने अपनी पेंटीग को देखने के लिए बिना सोचे पीछे की तरफ जाने लगा और उसे यह पता ही नही चला कि वह पहाडी के किनारे पर आ गया है।
पहाडी के ढलान पर गडरीये का एक छोटा बच्चा अपनी भेडों को चराकर घर ले जा रहा था। उसने देखा की राजा पीछे की तरफ लगातार आ रहा है और किसी भी समय वह पहाडी से नीचे गिर सकता है। छोटा बच्चा तुरन्त पहाडी की तरफ दौडता हुआ आया और राजा की बनायी पेंटीग को फाड दिया। यह देखकर राजा पेंटीग को बचाने के लिए पेंटीग के तरफ दौडा। राजा ने पेंटीग को फटा देखकर बच्चे के गाल पर जोरदार चाँटा मारा। राजा गुस्से में उस छोटे बच्चे पर चिल्लाया, “तुमने मेरे इतने सुन्दर पेंटिग को फाडने का साहस कैसे किया?” इस पर छोटे बच्चे ने कहा, “महाराज ऐसा मैनें आपकी जान बचाने के लिए किया है। आप पीछे मुडकर एक बार देखो। यदि आपने एक भी कदम और पीछे लिया होता तो आप पहाडी से नीचे गिर जाते और आपकी मृत्यु हो जाती।“
यह सुनकर राजा पीछे मुडकर देखा और यह देखकर चकीत रह गया कि अगर उसबे एक भी कदम और पीछे लिया होता तो वह पहाडी से नीचे गिर जाता। यह सब देखकर राजा ने छोटे बच्चे को धन्यवाद दिया और उसे अपने साथ राजमहल लेकर गया। ऱाजा ने बच्चे को अच्छे से शिक्षा दी और जब बच्चा बडा हुआ तो उसे राज्य का मुख्यमंत्री न्युक्त किया।
एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके तीन आलसी बेटे थे। वे तीनो कभी काम नही करते थे और हमेशा खर्च करने के लिए अपने पिता से पैसे माँगते रहते थे। इन सबसे परेशान होकर किसान ने एक दिन सोचा की इन्हें सबक सिखाना पडेगा।
एक दिन उसने अपने तीनों बेटो को बुलाया और कहा, “बच्चों, अब मैं बूढा हो गया हूँ और मैं आज तुम लोगों को एक राज बताना चाहता हूँ जिसे मैंने तुम लोगों से इतने दिन से छुपा कर रखा था”। किसान के तीनों बेटे पिता की यह बात सुनकर बहुत खुश हुए और साथ ही साथ बहुत उत्सुक भी हुए कि वह कौन सी राज की बात है जिसे पिता जी ने आज तक हमशे छुपा कर रखा था। तब किसान ने अपने बच्चों को कहा ध्यान से मेरी बात सुनो। उसने बोला, “मैनें खेत में एक खजाना छुपा रखा है। मैं यह भूल गया हूँ कि मैनें उसे कहाँ पर रखा था? तुंम लोगो को खेत कि खुदाई करनी चाहिए और उस खजाने को ढुढना चाहिए”।
आलसी लेकिन लालची बेटे इस काम को करने के लिए राजी हो गये। अगली सुबह वे जल्दी उठ गये और शाम तक उन्होनें पूरा खेत खोद डाला लेकिन उन्हे खजाना कही नहीं मिला। शाम को वे तीनो घर आये और अपने पिता से कहा, “पिता जी हम तीनों बहुत थग गये है, हमनें पूरा खेत खोद डाला लेकिन खजाना कहीं नही मिला”।
बूढा किसान मुस्कुराया और बोला, “कोई बात नहीं बच्चों, लगता है मैं खजाने का सही जगह भूल गया हूँ। अब यदि तुम लोगों ने पूरा खेत खोद ही डाला है तो क्यों ना उस खेत में कुछ मक्कों की बुवाई कर दी जाए”।
तीनों बेटे इस बात पर मान गये और खेत में मक्का लगाने के लिए बाजार जाकर मक्के के बीज लेकर आये। उन्होने उस खेत में मक्के की बुवाई कर दी। जल्द ही मक्के के पौधे तैयार हो गये और खेत मे लहलहाने लगे। बारीस भी हुई और इस तरह देखते – देखते तीन-चार महिने मक्के की फसल तैयार हो गयी। तब किसान ने अपने बच्चों से कहा, “बच्चों फसल तैयार हो गयी है और अब इसे तुम लोंग काटकर बाजार में बेच दो और इससे जो पैसें मिलेंगे वो मुझे लाकर दो”।
तीनों बेटे खेत में गये,फसल को काटा और बाजार में ले जाकर बेच दिया। इससे 1000 रुपये प्राप्त हुए। इन 1000 रुपयों को लाकर तीनों बेटों ने अपने पिता जी को दे दिया।
बूढे किसान ने पैसों को देखा और बोला, “बच्चों,यही वो खजाना है जिसके बारे मैंनें तुम्हे बताया था। यह खजाना इस खेत की मिटटी में छुपा था। तुम लोंगों के कठिन मेहनत ने इसे खोदकर बाहर निकाला है। यदि हर साल ऐसे ही तुम लोंग मेहनत करोगो तो यह खजाना तुम लोग पूरे जीवन प्राप्त करते रहोगे”।
उस बूढें किसान के तीनो बेटे अपने पिता की बात समझ गये थे। उस दिन से उन तीनों ने कठीन मेहनत किया और खुद के पैसें कमान शुरु कर दिया।
एक बार की बात है। एक आदमी अपने घर से दूर जाना चाहता था। यह भीषण गर्मी का मौसम था इसलिए उसने यात्रा करने के लिए एक गधे को किराये पर लेने के लिए सोचा और एक गधा और उसके मालिक को किराये पर लिया। गधे के मालिक ने आदमी को गधे पर बैठा दिया और स्वयं रस्सी पकडकर चलने लगा। चलते चलते मध्य दोपहर हो गयी।तब उन्होनें रुकने का निर्णय लिया और भोजन करने के बारे में सोचा। उस जगह पर कोई भी पेड और छायादार जगह नही थी जहाँ वे रुक कर आराम कर सके और भोजन कर सके। आदमी गधे के पीठ से नीचे उतर गया और गधे के शरीर के छाया में बैठ गया। गधे का मालिक भी आराम करना चाहता था। गधे के मालिक ने उस आदमी को धक्का देकर खडा होने को कहा और बोला, “ये जगह तुम्हारे आराम करने की नही है।मुझे गधे की छाया मे आराम करने दो, आखिरकार इस गधे को मैनें खरीदा है, इसलिए इसकी छाया भी मेरी है”।
आदमी चिल्लाया, “ये कैसे हो सकता है?” मैनें आज पूरे दिन के लिए इस गधे को खरीदा है और इसके पैसे चुकाये है।इसलिये आज के लिए गधा और गधे की छाया दोनो पर मेरा अधिकार है और इसका उपयोग मै करुगाँ”।ज्यादा होशियार मत बनो, इस पर मेरा अधिकार है। इस प्रकार दोनों के बीच बहस बढती चली गई और इस बहस ने भयंकर रुप ले लिया। दोनो आदमी बहस करते रहे।
इस बीच, धुप में खडा गधा तपतपाती धुप को सहन नही कर सका और वह छाया की तलाश में वहाँ से भाग गया।झगडा करने वाले दोनों आदमीयों को यह पता नहीं चला की वे जिस गधे और उसकी छाया के लिए लड रहे है वो दोनो वहाँ से उनको छोडकर भाग चुके है।
एक बार की बात है एक मेमना को बहुत तेज प्यास लगी। वह एक झरना के पास पानी पीने के लिए गया। उसी समय एक भूखा और प्यासा खतरनाक भेडिया भी उस झरने के पास पीनी पीने के लिए आया।जब उसने उस मेमने को देखा तो सोचा, “आह,क्या बात है, एक छोटा मेमना,मजा आ गया। मै इसे अपने बातो में फँसा लूँगा और आज इसे दोपहर में भोजने के रुप में खाउँगा”। इसलिए खतरनाक भेडिया झरने के उस तरफ गया जहाँ छोटा मेमना पानी पी रहा था।इसके बाद एक गुस्से भरी आवाज में भेडिये ने छोटे मेमने को बोला, “तुम यहाँ। छोटा मेमना भेडिये की तरफ देखा।भेडीये ने बोला, “मैं जिस पानी को पी रहा हूँ तुम उसे गंदा क्यों कर रहे हो?” इस पर छोटे मेमने ने बोला,“अरे, यह सत्य बात नही है। आप देख रहो हो की पानी आप की तरफ से निचे मेरी तरफ बह रहा है। तब कैसे मैं आपका पानी गंदा कर सकता हूँ?” इस पर भेडीये ने बोला, “ओह, तो अब तु मेरे से बहस भी करने लगा। तू अभी भी उतना ही बत्तमीज है जिताना की जब तु मेरे से एक महीने पहले मिला था।
इस पर छोटे मेमने ने बोला, “लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तो अभी केवल तीन महीने का हूँ। एक महिना पहले तो मै पैदा भी नही हुआ था”। भेडीये ने बोला, तब निश्चित ही वो तुम्हारी माँ होगी। इतना कहकर भेडीया उस छोटे मेमना पर झपट पडा और उसे मारकर खा लिया।
एक बार एक व्यापारी ने एक गधा और एक घोडा खरीदा। प्रत्येक दिन वह दोनों के पीठ पर सामान लादता और बाजार में बेचने के लिए ले कर जाता।
गर्मीयों के मौसम की बात है। एक दिन व्यापारी के पास बहुत कम सामान था। उसने सामान का एक बडा बण्डल बनाया और उसे गधे की पीठ पर लाद दिया। उसके बाद वह घोडे को साथ लेकर बाजार की तरफ चल दिया। वे तीनों जब आधे रास्ते पहुँचे तो गधा बोझा ढोते ढोते थक गया था। तब गधा घोडे के पास गया और उससे बोला, “दोस्त मैं थक गया हूँ। क्या तुम मेरा आधा बोझ ढोओगे”?
इस पर घोडे ने कहा, “बिल्कुल नही”।यह तुम्हारा बोझ है, इसे तुम ही ढो कर ले जाओ। मैं तुम्हारी सहायाता नही करुगाँ।
इसपर गधे ने कोई जबाब नही दिया। लगभग दोपहर का समय होने वाला था। गधा इतनी भीषण गर्मी में बोझ उठा नही पाया और जमीन पर बेहोश होकर गिर पडा और उसके मुँह से छाग निकलने लगा। यह देखकर व्यापारी ने गधे का पूरा बोझ घोडे के उपर लाद दिया। अब घोडे को पूरे बोझ को अकेले ही ढोना पडा और तब जाकर घोडे को यह एहसास हुआ की बेचारे गधे को कीतना कष्ट सहना पडा होगा। अब घोडा अकेले ही पूरे रास्ते बोझ को ढोकर बाजार तक लेकर गया।
एक जंगल में एक खरंगोश रहता था जिसका नाम “मिंकू” था।वह हमेशा ही भयभीत रहता था। यहाँ तक की जंगल में एक छोटी सी हलचल भी उसे डरा देती थी। एक बार की बात है। गर्मी के मौसम में मिकू एक छायादार आम के पेड के नीचे झपकी ले रहा था। तभी एक पका आम का फल पेड से गिरा और उसके सिर पर आ लगा। मिंकू डर के मारे उठ खडा हुआ। वह इतना डर गया कि उसने यह जानने की कोशीश भी नही की, की क्या हुआ है? वह वहाँ से यह चिल्लाते हुए भागा कि, “भागो, भागो, आसमान गिर रहा है”।
उसकी आवाज सुनकर गिलहरी और चिडियाँ भी चौकन्ने हो गये और मिंकू के साथ हो लिए।रास्ते मे उन्हें हिरण और भालू भी मिला और मिंकू ने उन्हे भी यही बताया कि आसमान गिर रहा है। इसलिए हिरण और भालू भी अपने पूरे परिवार सहित मिंकू के साथ हो लिए।
जानवरों की इतनी बडी भीड देखकर रास्ते में खडे हाथी ने उनसे पूछा, “तुम सभी लोग भागते हुए कहाँ जा रहे हो?”
तभी भागते हुए हिरण ने बोला, “तुम भी भागो और अपनी जान बचा लो।
हाथी ने पूछा, “पर क्यों”?
हिरण ने बोला,“मिंकू ने हमें बताया है कि आसमान गिर रहा है”।
“इसलिए हमें राजा के पास जाना चाहिए और उन्हें यह खबर देनी चाहिए”।
यह सुनकर हाथियों का झुण्ड भी उनके साथ हो लिया।रास्ते में तेदुंआ, लोमडी और बन्दर भी इनके साथ हो लिए। एक साथ इतने जानवरों के दौडने से इनके पैरों की आवाज से पूरा जंगल गूँज रहा था। रास्ते में खडे जेब्रा ने पूछा, “तुम सभी इतना जल्दी में दौडते हूए कहाँ जा रहे हो”?
जानवरों में से एक बन्दर ने बोला, “हम लोग राजा के पास जा रहे है और हम सभी उनसे निवेदन करेंगे की वो हम सभी को एक सुरक्षित स्थान पर ले कर जाये क्योकिं आसमान गिर रहा है”।
यह सुनकर जेब्रा ने भी उस जानवरों के विशाल झुण्ड में सामिल हो गया और उनके साथ राजा के पास जाने के लिए दौडने लगा। रास्ते में जिराफ और भेडियों ने भी उनके साथ सामिल हो गये।
इतने बडे जानवरों के झुण्ड को लेकर मिंकू शिघ्र ही जंगल के राजा शेर के गुफा के पास पहुँच गया। शेर जंगल के सारे जानवरों की आवाज सुनकर अपनी गुफा से बाहर आया। शेर दहाडते हुए जानवरों से पूछा, “तुम सभी यहाँ पर क्यों आये हो, तुम लोंग क्या करना चाहते हो?”
तभी जेब्रा बोला, “महाराज हम यहाँ पर आपको यह बताने आये है कि हमें यह जंगल तुरन्त छोडना पडेगा”।
शेर ने पूछा, “क्यों”?
भेडिये ने जबाब दिया, “महाराज, इसलिए क्योकि आसमान गिर रहा है”।
शेर ने पूछा,ऐसा तुम्हे किसने बताया?”
इस पर सभी जानवरों ने एक साथ बोला, “मिंकू खरगोश ने”।
शेर ने इस पर बोला, “मिंकू तुम मुझे वहाँ लेकर चलो जहाँ तुमने देखा कि आसमान गिर रहा है”।मिंकू शेर और सभी जानवरों को उस आम के पेड के पास लेकर गया जहाँ उसके सिर पर आम का पका हुआ फल गिरा था। पूछने पर मिंकू ने बताया कि वहाँ क्या हुआ था?” तभी शेर ने जमीन पर गिरा हुआ आम का फल देखा और समझ गया कि क्या हुआ था। शेर ने सभी जानवरो को बताया कि यह आम का फल मिंकू के सिर पर गिर गया और यह सोचा कि आसमान गिर रहा है। लेकिन उसने यह चेक नहि किया कि उसके सिर पर क्या गिरा?” और तुम सभी ने बिना किसी जाँच पडताल के उसके बातों पर भरोसा कर लिया। शेर ने सभी जानवरो का डाँटते हुए बोला कि तुम सभी के लिए शर्म की बात है कि तुम सब ने बिना सोचे समझे जंगल के शांति को खराब कर दिया”।इससे मिंकू और जंगल के सभी जानवर बहुत ज्यादा शर्मिदा महसूस किया और अपने अपने घरों को वापस चले गये।
बहुत समय पहले की बात है एक बाजार में एक बेकरी वाला रहता था। वह मिठाईयाँ,केक और दूध से बने सामान जैसे दही और पनीर बेचता था। लेकिन कुछ समय बाद चूहों ने उसके दुकान के अपना घर बना लिया। रोज रात को जब दुकानदार अपनी दुकान बन्द करके चाला तो सारे चुहे मिलकर रात भर उसके मिठाईयों, केक, पनीर और अन्य चीजों को खाते और उसे पूरी तरह बर्बाद कर देते।इस तरह रोज रोज के सामानों के नुकशान होने के कारण दुकानदार बहुत चिंतिंत हो गया था। तब उसके एक दोस्त ने उसे सुझाव दिया कि तुम एक बिल्ली पाल लो जिससे की चुहे भाग जायेगे।
बेकरी वाले ने एक बिल्ली खरीद कर लाया और उसे दुकान में चुहों को भगाने के लिये छोड दिया।धीरे धीरे बिल्ली ने बहुत सारे चूहों को मारकर खा लिया। इससे चूहे अपनी बिलों से बाहर आने मे भी डरने लगे। तब सारे चूहों ने मिलकर एक मिटिंग बुलाई। मिटिंग शुरु हुई, तब उन चूहों में से एक बूढा चूहा खडा हुआ और बोला, “मेरे प्यारे दोस्तों, हम सभी लोग यहाँ पर उस खतरनाक बिल्ली से छुटकारा पाने के लिए एक सामाधान खोजने के लिए इकट्ठा हुए है”।
तभी उसमें से एक और चूहे ने बोला, “सही बात है। अगर उस बिल्ली ने हमें ऐसे ही पकडरकर खाना जारी रखा तो हम सभी उसके डर से अपने बिलों से बाहर नहीं निकलेंगे और भूख और प्यास के कारण हम सभी मर जायेंगे”।
तब एक जवान और होशियार चूहा खडा हुआ और बोला, “बिल्ली धीरे से हमारे पास आती है और अचानक से हमें पकड लेती है और मारकर खा जाती है। हमें उसके गले मे एक घण्टी बाँध देनी चाहिए।
“हाँ” सही कहा। एक चूहें ने बडे उत्साह से बोला।इस तरह जब भी बिल्ली हमारी तरफ आयेगी तो उसके गले की घण्टी बजने के कारण हम सभी को उसके आने का पता चल जायेगा और हम सभी अपने अपने बिलों में घुसकर छुप जायेगें।
इस बात पर सभी चूहे सहमत हो गये और सभी के अन्दर खुशी की लहर दौड गयी और सभी चूहे उस जवान चूहे को बधाईयाँ देने लगे। तभी उसमें से एक बूजूर्ग चूहे ने बोला, “यह विचार तो बहुत ही अच्छा है लेकिन मुझे बताओ तुम सबमे से बिल्ली के गले में घण्टी कौन बाधेगा?”
इस सवाल पर चूहों मे सन्नाटा छा गया। अब वहाँ पर पूरी तरह सन्नाटा था। इस सवाल का किसी के पास कोई जबाब नहीं था।क्योकि इसके बारे में किसी ने भी सोचा नहीं था। इसी बीच उस बूढे चूहे ने बिल्ली को धीरे धीरे उनकी तरफ आते देखा।वह तुरन्त वहाँ से कूदा और सभी चूहों को यह कहते हुए भागा कि, “भागो, बिल्ली आ गयी और अपनी-अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर जा कर छुप जाओ।