हिन्दी में जानकारी (Hindi Quotes, Shayari और Hindi Kahani)

Hindi Kahani(नकलची कौआ)

हिन्दी कहानी

THE IMITATING CROW(नकलची कौआ)

एक बार की बात है एक बाज था जो कि बहुत उँचाई पर उडता था और जमीन पर तेजी से उतरता था और छोटे जानवरों जैसे-खरगोश, गिलहरी और चूहा आदी का शिकार करता था। बाज का एक दोस्त कौआ भी था जो बाज के इस कारनामें की बहुत प्रशंसा किया करता था।

एक दिन उस जगह के नजदीक एक गडरीया आया। वह गडरीया उस जगह से अपने भेडों को देख रहा था जो कि पास के मैदान में घास चर रही थी। तभी बाज ने उन भेडों में से एक छोटे मेमने को देखा जो कि लगभग एक सप्ताह का था। बाज ने उस मेंमने को खाने के लिए शिकार करने के बारे मे सोचा। इसलिये बाज पहाडी की चोटी से उडा और उस छोटे मेमने को अपने पंजों मे दबाकर उड गया।

रोज की तरह आज भी कौआ बाज के इस कारनामें को देख रहा था। कौआ बाज के इस कारनामें से बहुत ज्यादा प्रभावित था।

कौआ मन ही मन सोचने लगा, “बाज और मैं दोनों ही पक्षी है। अगर बाज अपना शिकार झपट्टा मारकर ले सकता है तो मैं क्यों नही”।

ये सब सोचकर कौआ जितना तेज हो सकता था उतना तेज उडता हुआ उँचाई पर गया और तेजी के साथ जमीन पर झपट्टा मारने के लिए जमीन कि तरफ आया लेकिन जमीन पर कैसे उतरा जाता है और फिर शिकार को लेकर कैसे उडा जाता है यह कौआ नही जानता था। इसलिए कौआ जमीन पर उतरते समय अपने गति और अपने आप को संभाल नही सका और जमीन पर तेजी के साथ जा गिरा।जिससे उसकी गर्दन और चोंच टुट गयी और कौआ उसी जगह मर गया।

कहानी से शिक्षा- इस हिन्दी कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों की नकल करना कभी भी खतरे से खाली नहीं होता है।

 

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THE SHEPHERD BOY’S LESSON(गडरीये के बच्चे कि सीख)

एक समय की बात है। एक गाँव में एक गडरीया रहता था। उसका एक बच्चा था जिसका नाम श्याम था। गडरीये के पास बहुत सारी भेडे थी जिन्हे चराने के लिए रोज खाली मैदान में ले जाया करता था। वह मैदान जंगल के पास था। उस जंगल मे बहुत सारे जानवर रहा करते थे।

एक दिन की बात है श्याम अपनी भेडों को चराने ले गया था। दोपहर का समय था।श्याम चुपचाप खाली बैठा हुआ था। तभी उसके दिमाग मे एक बदमाशी सुझी।उसने सोचा, चलो कुछ मस्ती करते है।

वह पास के उँची चट्टान पर गया और वहाँ से चिल्लाने लगा, “बचाओ,बचाओ। भेडीया आ गया।

पास के खेतो में काम कर रहे किसानों ने उसकी आवाज सुनी। वे सभी लकडी, डंडा,भाला और कुल्हाडि आदी लेकर श्याम को बचाने के लिए दौडते हुए आ गये। जब वे लोग श्याम के पास पहुँचे तो श्याम हँसने लगा और बोला, “मैनें आप लोगों को बेवकुफ बना दिया। हा,हा, यहाँ पर कोई भेडीया नही है। आप लोंग अपने खेतो मे वापस जोओ और काम करो और यह कहकर श्याम हँसने लगा।

सभी किसान मुस्कुराते हुए अपने-अपने खेतों मे काम करने चले गये। अगले दिन दोपहर में श्याम ने फिर से वही मजाक किया और फिर सारे किसान उसे बचाने के लिए दौडते हुए चले आये। लेकिन जब उन्हे पता चला कि श्याम ने फिर से मजाक किया है तो इस बार सारे किसान बहुत गुस्सा हो गये। किसानों ने श्याम को बोला, “बच्चे, तुम इस तरह झुठ मत बोलो और हमारा समय मत बर्बाद करो”।

किस्मत से उसके अगले दिन सच मे भेडीया आ गया और उसके भेडों पर हमला कर दिया और उन्हें मारना शुरु कर दिया। यह देखकर श्याम अपनी भेडों को बचाने के लिए चिल्लाने लगा लेकिन इस बार कोई भी किसान उसकी मदद करने नही आय़ा। सबने यही सोचा की श्याम इस बार फिर से मजाक कर रहा होगा।

भेडीये ने श्याम की बहुत सारी भेडों को मार दिया और बाद मे जंगल में भाग गया। इस तरह श्याम के झुठ और मजाक के कारण उसे अपनी भेडों को खोना पडा। तब श्याम यह सीख गया कि कभी भी जीवन मे झुठ न बोले और झुठा मजाक् न करे।

कहानी से शिक्षा- इस हिन्दी कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि झूठे आदमी पर कोई भी इंसान भरोसा नही करता है क्योंकि जो एक बार झूठ बोलता है वह इंसान हमेशा झुठ बोलेगा ऐसा सभी लोग सोचने लगते है।

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